केरल : भारत की राजनीतिक पार्टी सीपीआई (एम) के लिए स्पेन का एक नागरिक पर्यटक वीजा पर केरल में खुले तौर पर सार्वजनिक सड़क के किनारे दीवारों पर राजनीतिक लेखन कर रहा है। यह दृश्य भारत पर आये हुए खतरे को स्पष्ट कर रहा है कि अब हमारे अंदरूनी चुनाव की प्रक्रिया में भी विदेशी हस्तक्षेप बढ़ रहा है।

पर्यटन वीजा पर भारत घुमने आया विदेशी नागरिक हमारे चुनाव इकोसिस्टम में खुलकर भाग ले रहा है। स्पष्ट है कि यह पर्यटन नहीं है। यह वीजा कानूनों का घोर उल्लंघन है और भारत की आंतरिक सुरक्षा का गम्भीर और ख़तरनाक उल्लंघन है। यात्रा, संस्कृति और अन्वेषण के लिए पर्यटक वीजा जारी किए जाते हैं। स्थानीय राजनीतिक प्रचार में भाग लेने के लिए नहीं। अगर विदेशी नागरिक आज केरल की राजनीति में खुलकर दखल दे सकते हैं, तो कल भारत विरोधी या देश विरोधी संगठनों/समूहों को भी खड़ा/मदद कर सकता है।

केरल की माकपा सड़क पर राजनीतिक काम के लिए विदेशी पर्यटकों का इस्तेमाल कर रही है। यह भारत की संप्रभुता का सीधा समझौता है और घरेलू राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप के लिए एक खतरनाक मिसाल है।

एक विदेशी नागरिक पर्यटक वीज़ा (Tourist Visa) पर भारत में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि या कार्य में भाग नहीं ले सकता है। भारतीय वीज़ा दिशानिर्देशों के अनुसार, पर्यटक वीज़ा का एकमात्र उद्देश्य मनोरंजन, दर्शनीय स्थल देखना या दोस्तों/रिश्तेदारों से मिलना होता है, और किसी अन्य गतिविधि (जैसे काम करना, पत्रकारिता, या राजनीतिक कार्य) की अनुमति नहीं है।

यदि कोई विदेशी नागरिक पर्यटक वीज़ा शर्तों का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक दल के लिए काम करता है, तो उसे वीज़ा की शर्तों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है और भारतीय कानूनों के तहत, वीज़ा उल्लंघन या अवैध रूप से रहने पर 3 साल तक की कैद और ₹3 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में, 7 साल तक की जेल भी हो सकती है, खासकर यदि जाली दस्तावेजों का उपयोग किया गया हो।

वीजा शर्तों के उल्लंघन पर कानूनी धाराएँ: मुख्य रूप से विदेशी अधिनियम, 1946 (The Foreigners Act, 1946) और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 (The Passport (Entry into India) Act, 1920) के प्रावधान लागू होते हैं। धारा 14 अधिनियम के तहत, वीज़ा अवधि से अधिक समय तक रहने या बिना वैध दस्तावेज़ों के रहने पर गिरफ्तारी और हिरासत दोनों कार्रवाई की जाती है। दोषी ठहराए जाने के बाद सज़ा पूरी होने तक नियमित जेल में रखा जाना। सज़ा के बाद उसे उसके देश में निर्वासित (deported) कर दिया जाएगा और भविष्य में भारत में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

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