अभी कतर का न्यूज़ चैनल "अल जज़ीरा" ने अफगानिस्तान पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान सहित भारत का पुराना नक्शा अपने एक डॉक्यूमेंट्री में दिखाया है, जिसमें भारत और अफगानिस्तान की सीमा जुड़ी हुई है, इनके अलावा अभी के पाकिस्तान और बांग्लादेश देश की सीमाओं को नहीं दिखाया गया है। दरअसल यह तैयारी है उस पुराने आर्थिक गलियारा को नये समय में 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप' आर्थिक गलियारा को बनाने की ! यह संपर्क मार्ग 'भारत-मध्य पुर्व (इस्लामिक देश)-यूरोप' के लिए व्यापारिक विस्तार, तकनीकी सहयोग और सामरिक साझेदारी के समेकित विकास के लिए एक सुनहरा और सच होने जैसी तस्वीर पेश करता है, अगर यह आने वाले वर्षों में क्रियान्वयन होता है तो यह इस पूरे क्षेत्र का समृद्ध और स्थिर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है। - अरुण प्रधान

अभी कतर का न्यूज़ चैनल “अल जज़ीरा” ने अफगानिस्तान पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान सहित भारत का पुराना नक्शा अपने एक डॉक्यूमेंट्री में दिखाया है, जिसमें भारत और अफगानिस्तान की सीमा जुड़ी हुई है, इनके अलावा अभी के पाकिस्तान और बांग्लादेश देश की सीमाओं को नहीं दिखाया गया है। दरअसल यह तैयारी है उस पुराने आर्थिक गलियारा को नये समय में ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप’ आर्थिक गलियारा को बनाने की ! यह संपर्क मार्ग ‘भारत-मध्य पूर्व (इस्लामिक देश)-यूरोप’ के लिए व्यापारिक विस्तार, तकनीकी सहयोग और सामरिक साझेदारी के समेकित विकास के लिए एक सुनहरा और सच होने जैसी तस्वीर पेश करता है, अगर यह आने वाले वर्षों में क्रियान्वयन होता है तो यह इस पूरे क्षेत्र का समृद्ध और स्थिर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है। – अरुण प्रधान

अरुण प्रधान

इस्लामिक दुनिया अब सम्पन्नता और समृद्धि के लिए नया क्षितिज तलाश रहा है। यह हम एक नये विवाद में देख सकते हैं, जिसे ‘अल जजीरा‘ ने पैदा किया है। हाल ही में कतर का एक विश्व-प्रसिद्ध न्यूज नेटवर्क “अल जज़ीरा” ने अपनी एक लघु डॉक्यूमेंट्री में भारत का एक नया नक्शा दिखाया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर को भारत के नक्शे में शामिल किया है और पाकिस्तान के नक्शे से हटा दिया है। दरअसल, इस्लामिक दुनिया अपने लिए समृद्धि और विकास का रास्ता ढूंढ रहा है और यह सुनहरा अवसर है ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’। यह संपर्क मार्ग ‘भारत-मध्य पुर्व (इस्लामिक देश)-यूरोप’ के लिए व्यापारिक विस्तार, तकनीकी सहयोग और सामरिक साझेदारी के समेकित विकास के लिए एक सुनहरा और सच होने जैसी तस्वीर पेश करता है, अगर यह आने वाले वर्षों में क्रियान्वयन होता है तो यह इस पूरे क्षेत्र का समृद्ध और स्थिर भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।

इस्लामिक देशों में आया यह बदलाव भारत के लिए कूटनीति और राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्लामिक दुनिया के प्रभावशाली मीडिया संस्थान ‘अल जज़ीरा’ ने अपनी पहले की नीति से हटकर भारत के अपने भू-क्षेत्रीय दावों को मान्यता दी है जिसमें भारत का अविभाजित भूभाग है और प्रकाशित उस मानचित्र में भारत की सीमा अफगानिस्तान से जुड़ी है, बीच में पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं है, यानी एक अविभाजित भारत।

अल जज़ीरा द्वारा भारतीय नक्शे को इस रूप में दिखाना भारत की बढ़ती वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता तथा मध्य पूर्व में उसकी प्रभाव का असर हो सकता है। यह पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है इससे उसकी कश्मीर पर पकड़ शायद कमजोर होती दिखे। किन्तु अल-जजीरा द्वारा प्रकाशित भारत के इस नए नक्शे के पीछे की योजना स्पष्ट होकर सामने नहीं आया है, हम कथित ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ बनाए जाने की योजना का संकेत भर मान रहे हैं। अभी चीजों को और स्पष्ट होना है।

किन्तु हम इसे यह संकेत मान सकते हैं कि अब विश्व के बड़े खिलाड़ी, मीडिया और क्षेत्रीय देश भारत के समर्थन में खड़े हो रहे हैं, भारत का तथा भारत में भविष्य देख रहे हैं। जिससे पाकिस्तान को कूटनीतिक चुनौती भी मिल रही है। क्योंकि भारत के लिए विभाजन आज भी एक मुद्दा है और कश्मीर भी। लेकिन इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि पूरी इस्लामिक दुनिया ने भारत के कश्मीर दावे का सामूहिक समर्थन किया है, किंतु यह जरूर है कि कुछ इस्लामी देश और मीडिया अब भारत के भू-राजनीतिक दावों को गंभीरता से लेने लगे हैं।

अलजज़ीरा के नक्शे में भारत और अफगानिस्तान की सीमाएं भी जुड़ी हुई दिखती हैं, जो ऐतिहासिक तथ्य भी है, और अब पुनः दक्षिण एशिया को यूरोप और इस्लामिक दुनिया से जोड़ने की संभावना दर्शाती हैं। यह मध्य पूर्व में भारत की बढ़ती मौजूदगी और भारत की छवि मजबूत होने को दर्शाता है। इस बदलाव से वैश्विक राजनीतिक संतुलन में एक नई दिशा दिख रही है।

‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’, अगर यह योजना सच होकर जमीन पर उतरता है और यह मार्ग स्थापित होता है तो भारत सहित दक्षिण पूर्व एशिया के साथ इस्लामिक दुनिया और यूरोप के बीच हवाई, समुद्री मार्गों के साथ सड़क, रेल मार्ग से व्यापक व्यापार, आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के द्वार खुलेंगे। माल, ऊर्जा, तकनीकी और निवेश का आदान-प्रदान बढ़ेगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलेगी। बड़े स्ट्रक्चर का निर्माण और क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक रोजगार के अवसर आयेंगे।

व्यापारिक समृद्धि और आर्थिक विकास के नए युग की शुरुआत करने के लिए ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ IMEC भारत सहित इस्लामिक देशों के लिए एक सुनहरा अवसर है। इस गलियारे के माध्यम से माल और सेवाओं के परिवहन में 30 प्रतिशत तक लागत कम होगी और अंतरराष्ट्रीय पारगमन समय में 40 प्रतिशत तक की कमी आएगी, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा और व्यापार क्षमता में वृद्धि होगी।

‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ का यह मार्ग मध्य पूर्व देशों के विभिन्न बंदरगाहों, रेलवे, सड़कों और ऊर्जा पाइपलाइनों को जोड़ते हुए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करेगा, जिससे विश्व व्यापार में इस्लामिक दुनिया के देशों को अपनी भागीदारी को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। और यूरोप को भी भारत और मध्य एशिया के बाजारों तक अधिक तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे व्यापारिक लागत और समय में कमी आएगी। यूरोपीय देशों को तेल के लिए रूस पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग मिल जाएगा।

यह भविष्य का संभावित मार्ग भारत, मध्य एशिया और यूरोप के बीच तकनीकी, शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाएगा, जिससे शोध, स्टार्टअप्स और निवेश के नए मौके विकसित होंगे। यह संपर्क मार्ग यूरोप के लिए चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल का एक विकल्प होगा, एशिया के साथ सामरिक साझेदारी को भी मजबूत करेगी और वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है जहां भारत, इस्लामिक देश और यूरोप आर्थिक व सामरिक नए गठजोड़ बनेंगे। यह भारत को बहुध्रुवीय विश्व के एक मजबूत और प्रभावशाली देश के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा, जो अंततः पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक होगा।

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