सिलीगुड़ी : भारत ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर जो चिकेन नेक कोरिडोर के नाम से प्रसिद्ध है, पर एक बड़ी सैन्य तैनाती शुरू की है, जहाँ उसने तीन नए सैन्य ठिकाने स्थापित किए हैं। यह कदम उत्तर-पूर्व को मुख्य भूमि भारत से जोड़ने वाले इस 22 किलोमीटर लंबे गलियारे को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के बीच स्थित है। इस तैनाती का उद्देश्य इस संवेदनशील क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करना है।
भारत के मुसलमानों ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019, CAA और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर NRC का राष्ट्रीय स्तर पर विरोध किया था। जिसका केंद्र दिल्ली का मुस्लिम बहुल और अवैध घुसपैठिया बहुल इलाका शाहीन बाग था। इसी दिल्ली के शाहिन बाग आन्दोलन और फिर दिल्ली दंगा के बाद अपने भाषण तथा भूमिका के कारण गिरफ्तार शरजील इमाम (शरजील इमाम का जन्म 1988 में बिहार के जहानाबाद जिले के काको गाँव में हुआ था। उनके पिता अकबर इमाम एक राजनीतिज्ञ (आईआईटी) थे; उनकी माँ अफशां रहीम एक गृहिणी हैं, और उनके भाई मुज़म्मिल इमाम एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। अकबर इमाम 2005 के विधानसभा चुनाव में जहानाबाद निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार थे। इसी राष्ट्र द्रोही आतंकी की बहन फराह निशत अब जज बन चुकी है) इसी ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) को काटकर पूर्वोत्तर भारत के सात बहिनों असम, अरुणाचल प्रदेश आदि को देश से अलग करने की योजना पर काम कर रहा था। खैर!
सन 1962 के भारत-चीन युद्ध ने इस कॉरिडोर की कमजोरियों को उजागर किया था। इसके बाद ही भारत ने इस क्षेत्र में अपनी रक्षा को मजबूत करने के प्रयास किए। और, हाल के वर्षों में चीन की आक्रामकता और बांग्लादेश में इस्लामिक रेडिकलिज्म उपद्रव बढ़ने की घटनाओं के कारण इसकी सुरक्षा को और अधिक महत्व दिया गया है। सेना तथा बीएसएफ ने उत्तर बंगाल में इस महत्वपूर्ण चिकन नेक सिलीगुड़ी कारिडोर की सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ाई है। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह कारिडोर पड़ोसी देशों के साथ उत्तर पूर्वी राज्यों को भी शेष भारत से जोड़ता है।
ये सैन्य बेस सिर्फ रक्षा के लिए नहीं हैं। भारत अपनी पूर्वी सीमा को मजबूत करने के लिए इन तीन नए सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है। ये रैपिड डिप्लॉयमेंट फोर्स, इंटेलिजेंस यूनिट और पैरा स्पेशल फोर्स से लैस होंगे। वायुसेना अड्डों को तैयार रहने को कहा गया। भारत ने ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा के मद्देनजर बीएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, एसएसबी और सीआइएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों को अलर्ट रहने का आदेश दिया है। साथ ही उत्तर बंगाल में महत्वपूर्ण एयरबेस हासीमारा और बागडोगरा के वायुसेना अड्डों को भी तैयार रहने को कहा गया है। इनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस जरूरी कॉरिडोर की सुरक्षा से कभी कोई समझौता न हो।
पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ता है यह सिलीगुड़ी कारिडोर अपनी संकरी चौड़ाई के कारण ‘चिकन नेक’ के नाम से प्रसिद्ध है। 22 किलोमीटर लंबा यह गलियारा पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भारत के मुख्य भूभाग से जोड़ने वाली एकमात्र कड़ी है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा भारत के आठों पूर्वोत्तर राज्यों को देश के मुख्य भूभाग से अलग-थलग कर सकती है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाला एक संकरा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण भूभाग है।
थोड़ा इस चिकन नेक सिलीगुड़ी कॉरिडोर का इतिहास जानते हैं। वास्तव में सिलीगुड़ी कोरिडोर का इतिहास 16वीं शताब्दी में कूच बिहार साम्राज्य का हिस्सा बनने और बाद में सिक्किम का भाग बनने से शुरू होता है। यह भूभाग की भारत के लिए सामरिक तौर पर बेहद संवेदनशील है। यह सन 1962 के भारत-चीन युद्ध ने इसका महत्व उजागर किया, जिससे भारत ने इस क्षेत्र में अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए कदम उठाने पड़े।
पूर्वोत्तर भारत के 4 करोड़ निवासियों और देश के बाकी हिस्सों के बीच होने वाला सारा स्थल व्यापार इसी सिलीगुड़ी कॉरिडोर से होकर गुजरता है। वर्ष 2002 में भारत के साथ मिलकर नेपाल, भूटान और बांग्लादेश ने एक मुक्त व्यापार समझौते पर चर्चा तो की थी ताकि सिलीगुड़ी गलियारे के पार माल की आवाजाही सुगम हो जाती, लेकिन ऐसा समझौता नहीं हो पाया। सिलीगुड़ी में रेल-आधारित माल ढुलाई के लिए केवल एक सिंगल-लाइन रेलवे ही है। इस क्षेत्र में रेलवे और सड़कें बार-बार होने वाले बरसात और भूस्खलन क्षतिग्रस्त होते रहते हैं। भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र में रिकॉर्ड तोड़ वर्षा होती है।
इस गलियारे के सन 1971 से पहले के दौर से आज की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। उत्तर और पूर्वी पाकिस्तान में चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण यह क्षेत्र सीमा पार से निरंतर तनाव झेलता है। सन 1962 में चीन के साथ युद्ध के बाद से भारत सरकार ने इस क्षेत्र के भविष्य की कल्पना की कि अगर सीमा सुरक्षा अपग्रेड नहीं की गई तो “चीनी सेना आसानी से बाईपास कर सकते हैं और कमजोर सिलीगुड़ी गलियारे को अवरुद्ध करने और पूर्वोत्तर को काटने के लिए विशेष बलों को उतार सकते हैं।”
क्योंकि चीन की भूटान के साथ चल रही कूटनीति इस संभावना को गंभीरता से लेने को मजबूर कर रही है। 1996 में, चीन ने डोकलाम पठार के बदले भूटान के साथ सीमा का दावा करने के लिए एक ठोस कूटनीतिक प्रयास शुरू किया।
सिलीगुड़ी में भारत की स्थिति उस थोड़ी सुधरी जब सिक्किम की छोटी सी राजशाही जो सिलीगुड़ी के ठीक उत्तर में, नेपाल, चीन और भूटान के बीच स्थित थी, वर्ष 1975 को भारत में विलय हो गई और भारत का दूसरा सबसे छोटा राज्य बन गया, सिक्किम। उसके बाद भी सिक्किम लंबे समय से भारत और चीन के बीच विवादित रहा। 2000 में, चीन ने सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह एक स्वतंत्र राज्य है। ऐसा करने का निर्णय तिब्बती बौद्ध धर्म की ब्लैक हैट शाखा के 17वें करमापा को लेकर उठे विवाद के कारण हुआ था। लेकिन वर्ष 2003 में चीन ने अपने आधिकारिक दस्तावेजों और मानचित्रों में सिक्किम को एक अलग राज्य के रूप में सूचीबद्ध करना बंद किया और उसे भारत हिस्सा माना।
भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसके महत्व को स्वीकार करते हुए सिलीगुड़ी क्षेत्र में भारतीय सेना, असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और पश्चिम बंगाल पुलिस सभी इस क्षेत्र में गश्त करती है। भारतीय खुफिया एजेंसी ने यह अनुमान लगाया है कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने नेपाल में विद्रोहियों के माध्यम से सिलीगुड़ी का फायदा उठाने की कोशिश की है। भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) इस क्षेत्र में नेपाली, भूटानी और बांग्लादेशी गतिविधियों पर भी कड़ी नज़र रखती है। क्योंकि सिलीगुड़ी भारत में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ का भी एक रास्ता है।
