अरुण प्रधान

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एक नया बिहार और विकास पर अग्रसर बिहार बनाने के बिहारी जनता के इच्छा आकांक्षा का प्रतिबिम्ब है। बिहारी मतदाताओं ने एनडीए को प्रचंड बहुमत दिया और महागठबंधन को, मुख्य तौर पर राजद-कांग्रेस को धूल चटाया है। हां, यह सही है कि इसमें बिहार की महिलाओं को 10 हजार रुपए जो नितिश कुमार द्वारा दिये गये, वह वोट मर्ज करने में बड़ी भूमिका निभाई।

बिहार में एनडीए की जीत और अपनी प्रचंड हार पर अपना राजनीतिक विश्लेषण करने के वजाए भ्रष्ट-जातिवादी- साम्प्रदायिक-बलात्कारी-गुंडई-माफियागिरी की जननी कांग्रेस-राजद के युवराज राहुल गांधी तथा तेजस्वी यादव चुनाव आयोग और भाजपा पर ही ठिकरा फोड़ रहे हैं। अब इस विपक्ष के होशियारचंद, हिसाब लगा रहे कि राजद को इतने करोड़ मत मिले, पर सीट इतनी कम, लोकतंत्र का मज़ाक उड़ा रहे ! चुनाव के पहले चुनाव आयोग को वोट चोर कहने वाले इसी बहाने कम से कम मान रहे हैं कि वोटों की चोरी नहीं हुई । किन्तु इस बार विपक्ष के सीटों की चोरी हो गई !

विपक्ष के ये होशियारचंद गणितज्ञ बेवकूफ नहीं हैं बल्कि ये शातिर लोग हैं जो अपना समाज-भारत विरोधी नैरेटिव फैला रहे हैं। किन्तु बिहार की जनता को यह समझना होगा कि जब कोई पार्टी अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो उसे मिला हुआ वोट को मिलाकर मत ज्यादा होगा। उस पार्टी के प्रत्येक सीट पर यदि कोई उम्मीदवार कम मत भी पाता है तो उस सीट पर उससे थोड़ा ज्यादा मत पाना वाला उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाएगा। उस पार्टी को मिला कुल वोट इस प्रकार सभी सीटों की संख्या से जोड़ कर बढ़ जाता है और यह भ्रम फैलाया जा सकता है कि फलना पार्टी को ज्यादा वोट मिला फिर भी हार गई, यही विपक्ष के शातिर होशियारचंद कर रहे हैं। पिछले लोकसभा में भाजपा पूरे देश में सबसे ज्यादा मत पायी फिर भी सीट 240 ही आई थी।

पार्टी वोट (लाख में ) प्रतिशतसीट
भाजपा100.89 (1.0089 करोड़)20.08%89
जदयू96.6719.25%85
राजद115.4623%25
एलजेपी24.974.97%19
कांग्रेस 43.748.7106

यह गणित नासमझ लोगों को भ्रमित करने के लिए बताई जाती है। नहीं ध्यान देंगे तो इनकी बात सही लगने लगती है कि बीजेपी को 1 करोड़ वोट पर 89 सीट लेकिन तेजस्वी को 1.15 करोड़ पर केवल 25 सीट ऐसे ही चिराग पासवान की पार्टी को 24 लाख वोट पर 19 सीट वहीं कांग्रेस को लगभग 44 लाख वोट पर केवल 6 सीट हासिल हुआ, यह जरूर चुनाव आयोग और सत्ता के गठजोड़ का षडयंत्र है!

पिछले झारखंड विधानसभा चुनाव को याद करें इस चुनाव में JMM को 23% वोट पर 31 सीट और बीजेपी को 33% वोट पर 21 सीट मिली। यह गणित और व्यवस्था अलग है, कुल मिले वोट से सीटें तय नहीं होती हैं। विपक्ष के लिए एक शेर पेश है – अपना चेहरा न देखा गया – आइने से ख़फ़ा हो गये !

भाजपा जिस तरह से चुनाव लड़ती है वहाँ तक पहुंचना भी फिलहाल इन युवराजों के लिए सम्भव नहीं। भाजपा का पूरा कैडर लग जाता है चुनाव में। पूरे भारत से लोग बिहार पहुँच गए थे प्रचार करने और वोट करने।

एक वाकया याद करिए, पटना राजद कार्यालय पर मदन शाह ने उस दिन रोते हुए टिकट न मिलने पर लालू यादव और तेजस्वी यादव को शाप दिया था कि यह 25 सीट पर सिमट जाएगा, लालू-तेजस्वी बहुत घमंडी है, 3 करोड़ रूपये लें लिया और टिकट नहीं दिया है और पैसा मांग रहा है !! ठीक 25 सीट ही मिली राजद को..!! एक भी सीट कम मिलता तो राजद को मुख्य विपक्षी दल का दर्ज़ा भी नहीं मिलता।

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