'सप्ताह के कवि' शृंखला में कवयित्री मौसम कुमारी की कविता "मौसम कुमारी"...

'सप्ताह के कवि' शृंखला में कवयित्री मौसम कुमारी की कविता "मौसम कुमारी"...

■□■ हैप्पी एनिवर्सरी : वो दिन जब हम एक-दूसरे को फिर से “हाँ” कहते हैं’… : मौसम कुमारी

हैप्पी एनिवर्सरी : वो दिन जब हम एक-दूसरे को फिर से “हाँ” कहते हैं!

आज फिर वो तारीख आ गई, जब हम दोनों कैलेंडर देखकर एक साथ मुस्कुरा पड़े।
“अरे, आज तो हमारी सालगिरह है!”
और फिर हम एक-दूसरे को देखकर सोचते हैं, “वाह! इतने सालों से एक-दूसरे को रोज़ नए तरीके से पसंद करने का रिकॉर्ड अभी तक नहीं टूटा। ये तो ओलंपिक गोल्ड से भी कीमती है!”

लोग पूछते हैं, “शादी के इतने सालों बाद भी प्यार बचा हुआ है?”
हम हँसते हैं और बोलते हैं, “बचा हुआ नहीं, अपग्रेड होता जा रहा है। पहले सिर्फ़ दिल धड़कता था, अब पूरा घर एक साथ धड़कता है। बच्चे, कुत्ता, वाई-फ़ाई राउटर… सब हमारे प्यार की बीट पर थिरकते हैं।”

पहले सालगिरह पर हम एक-दूसरे को लंबे-लंबे लव लेटर लिखते थे।
अब हम एक-दूसरे को छोटे-छोटे नोट्स लिखते हैं, पर उनमें जादू बहुत है:
“दूध गरम करके रख दिया है”
“तेरी फेवरिट वाली चाय बना दी”
“बच्चे सो गए, अब तेरी बारी है मेरी गोद में सोने की”
ये नोट्स पहले वाले लव लेटर से ज्यादा रोमांटिक हैं, क्योंकि इनमें अब सिर्फ़ वादे नहीं, हक़ीक़त होती है।

गिफ्ट भी अब समझदारी से देते हैं।
पहले हीरे-मोती देते थे।
अब एक-दूसरे को “आराम” गिफ्ट करते हैं।
पत्नी: “आज रसोई में मैं नहीं जाऊँगी, तू बना लेना।”
पति: “आज मैं सारा दिन बच्चों को संभाल लूँगा, तू सो जाना।”
देखा? अब हम एक-दूसरे को वो देते हैं जो पैसों से नहीं खरीदा जा सकता – सुकून।

डिनर भी अब महंगा नहीं, मतलब वाला होता है।
कभी ढाबे पर, कभी बालकनी में, कभी बिस्तर पर प्लेट लेकर।
बस एक शर्त होती है – आज हम सिर्फ़ एक-दूसरे की बातें सुनेंगे।
न बच्चों की पढ़ाई, न EMI, न मायके-ससुराल।
बस हम और हमारी पुरानी कहानियाँ।
“याद है जब हम पहली बार मिले थे…?”
और फिर हम दोनों हँसते हैं, क्योंकि वो कहानी हर साल और मज़ेदार हो जाती है।

सालगिरह का सबसे बड़ा मज़ा तो ये है कि हम एक-दूसरे को फिर से चुनते हैं।
दुनिया कहती है, “शादी एक समझौता है।”
हम कहते हैं, “नहीं, शादी एक रोज़ का नया चुनाव है।”
हर सालगिरह पर हम चुपके से एक-दूसरे से पूछते हैं,
“अगले साल भी साथ चलोगे?”
और जवाब हमेशा वही होता है –
“चलेंगे… और थोड़ा तेज़ चलेंगे, क्योंकि अब रास्ता अच्छे से पता है।”

तो आज फिर हम वादा करते हैं:
हम एक-दूसरे को बूढ़ा होते देखेंगे,
एक-दूसरे के सफ़ेद बालों को गिनेंगे,
एक-दूसरे की दवाइयों की याद दिलाएँगे,
और जब चलना मुश्किल हो जाएगा, तब व्हीलचेयर पर एक साथ बैठकर सूरज ढलते देखेंगे।

क्योंकि हमारा प्यार अब बच्चों जैसा नहीं रहा,
अब वो प्यार है जो दो पुराने पेड़ों की जड़ों सा हो गया है –
दिखता कम है, पर पूरा ज़मीन को थामे रहता है।

हैप्पी एनिवर्सरी मेरी जान,
तू नहीं होती तो मैं आज भी वही अधूरा इंसान होता।
और मैं नहीं होता तो तू आज भी अपनी हँसी को पूरी तरह से हँस नहीं पाती।

हम एक-दूसरे के लिए बने थे,
फिर भी हर सालगिरह पर हम एक-दूसरे को फिर से बनाते हैं –
और प्यार करते हैं।

चल, आज फिर से शादी कर लेते हैं…
बस इस बार कोई मेहमान नहीं, कोई डीजे नहीं,
बस तू, मैं, और हमारा हमेशा वाला वादा।

हैप्पी एनिवर्सरी…
फिर से, हमेशा से, और हमेशा तक। मौसम कुमारी (07 दिसम्बर 2025) Email : mausam.singh261986@gmail.com

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