बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का परिणाम 14 नवंबर की शाम को आ गया और राजद नित् महागठबंधन भारी अंतर से हार गया और एनडीए को बिहार की जनता ने अपार बहुमत देकर सत्ता में भेजा। इसके बाद लालू प्रसाद यादव परिवार में शांत बैठा कलह उग्र हो बाहर आ गया। लालू पुत्री रोहिणी आचार्य को लालू के घर में ‘होने वाले मुख्यमंत्री’ तेजस्वी यादव ने चप्पल से पिटा और घर से धक्का मारकर बाहर निकाल दिया। अब अपने पिता लालू को महान बता रही रोहिणी रोना रो रही है, लेकिन अपने बाप और खानदान के काले कारनामे और राजद शासन में महिलाओं के अनवरत बलात्कार (दलित चम्पा विश्वास, शिल्पी जैन) को याद नहीं करती है। खैर!
अब जब उसी रोहिणी आचार्य ने रोते बिलखते बताया कि उसके भाई तेजस्वी यादव ने ही उसे चप्पल से पिटवाकर घर से निकाल दिया है तो यह खबर पटना के उन सैकड़ों व्यापारियों के जख्मों पर थोड़ा सा मरहम लगाकर गई होगी जिन्हें इसके विवाह के दौरान लूटा गया था।
24 मई 2002, यह वो दिन था जिसे पटना के व्यापारी शायद आज तक नहीं भूले होंगे जब रोहिणी आचार्य की मां और लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री थी और बेटी रोहिणी आचार्य के विवाह का दिन था। लेकिन इस विवाह के दौरान संगठित लूटपाट और लालू यादव के अपराधी खानदान का जो विद्रूप चेहरा बिहार सहित पूरे देश ने देखा था।
यह वो समय था जब लालू यादव चारा घोटाले में फंसा हुआ था और पत्नी राबड़ी देवी बिहार को मुख्यमंत्री बनाया था। राबड़ी देवी के दोनों भाई, लालू के साले साधू यादव और सुभाष यादव की गुंडागर्दी पूरे बिहार में चरम पर थी। ये दोनों कुख्यात अपराधी की बहन मुख्यमंत्री थीं और मुख्यमंत्री कार्यालय यही चलाता था।
लालू यादव ने अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के विवाह को एकदम राजसी कार्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी साधु और सुभाष यादव को दी थी। इस विवाह समारोह के लिए लगभग 25000 मेहमानों को मुख्यमंत्री आवास में आमंत्रित किया गया था जिसमें बिहार सहित देशभर से बड़े बड़े लोगों को बुलाया गया था।
यद्यपि विवाह तो लालू की बेटी का था लेकिन इस विवाह समारोह की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी पटना के व्यापारियों पर थोप दी थी। साधु यादव और सुभाष यादव के गुंडों को लूटपाट के काम पर लगा दिया गया। जहां भी जिस चीज की जरूरत पड़ती उसे लूट लिया जाता था।
वीवीआईपी मेहमानों के लिए लक्जरी गाड़ियों की जरूरत थी तो साधु यादव पटना के मारुति, टाटा इत्यादि बड़े कार शोरूम पहुंचा और पचासों महंगी महंगी लक्जरी गाड़ियों को उठवा लिया। जिस शोरूम ने थोड़ा विरोध करने का प्रयास किया वहां जमकर तोड़फोड़ मचाई गई। इन गाड़ियों में मुफ्त का ईंधन भरने की जिम्मेदारी पेट्रोल पंपों की थी और इसके लिए पंपों पर बाकायदा पुलिस तैनात की गई थी।
मेहमानों के बैठने के लिए सोफे चाहिए थे तो पटना के लग्जरी फर्नीचर शोरूम से महंगे महंगे सोफों को लूट लिया गया। रेमंड जैसे कई ब्रांडेड कपड़ों के शोरूम से जो मन किया लूट लिया। ड्रायफ्रूट्स, क्रोकरी, महंगे गिफ्ट्स, आतिशबाजी, टेंट जहां जो मिला सब साधु यादव और सुभाष यादव के गुंडों ने लूट लिया। इस प्रकार की लूटपाट के दौरान इन गुंडों के साथ बाकायदा बिहार पुलिस के सिपाही भी मौजूद होते थे।
इस लूटपाट के बाद इस विवाह के लिए आलीशान पंडाल बनवाए गए जिनमें से एक मुंबई के ताज होटल जैसा पंडाल बनवाया गया था। इस पंडाल में लालू यादव माफिया स्टाइल में वायरलैस माइक लेकर मेहमानों को संबोधित कर रहा था।
लालू पुत्री को अपने ऊपर भाई तेजस्वी यादव द्वारा पड़े गालियों और चप्पलों के साथ अपने बाप-मां के शासन काल में बिहार के जनता को भोगवाए गए दुःखों, लूटपाट, जातिय नरसंहार और महिलाओं के बलात्कार को भी याद करना चाहिए और शर्म करना चाहिए।
अब नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार और नितीश कुमार की बिहार सरकार लालू-राबड़ी के शासन में उसके परिवार और राजद नेता-कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए अपराधों और बलात्कार की फ़ाइल खोले और इन अपराधियों को सजायाफ्त करें। (चित्र साभार गूगल)





