
शिंज़ो-आबे-Shinzo-Abe
नई दिल्ली, 8 जुलाई 2022: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे Shinzo Abe पर चुनावी भाषण के दौरान हुए जानलेवा हमले के बाद निधन हो गया है| जापान के सरकारी मीडिया NHK ने निधन की पुष्टि की है, आबे पर हुए हमले को प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने एक ‘घृणित कार्य’ बताया है| संदिग्ध हमलावर की पहचान तेत्सुया यामागामी के रूप में की गई है| वह नारा सिटी का ही रहने वाला है| जापान के सरकारी प्रसारक एनचके के अनुसार, हमलावर ने हैंडमेड गन से गोली मारी है|
भारत में भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिन के राष्ट्रीय शोक का एलान करते हुए कहा कि ”अपने प्यारे दोस्त शिंज़ो आबे पर हुए हमले से मैं बहुत दुखी हूँ. मेरी संवेदना परिवार और जापान के लोगों के साथ है|”

भारत और जापान की दोस्ती का ज़िक्र में साल 1998 का ज़िक्र ज़रूर आता है| दोनों देशों की दोस्ती का यह अध्याय, जब दोस्ती में थोड़ी दरार आ गई थी| किन्तु शिंजो आबे ने भारत-जापान की दोस्ती में नए अध्याय जोड़े| साल 2006-07 में जब शिंजो आबे जापान के पहली बार प्रधानमंत्री बने| उस दौरान 2007 में वो भारत आए और संसद को संबोधित किया| साल 2014 के गणतंत्र दिवस के मौके पर वो मुख्य अतिथि थे| पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों की दोस्ती और परवान चढ़ी| साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तो उपमहाद्वीप के बाहर द्विपक्षीय यात्रा के लिए उन्होंने जापान को ही चुना| अपने दो टर्म में पीएम मोदी छह बार जापान जा चुके हैं| शिंज़ो आबे अपने दूसरे कार्यकाल में तीन बार (2014, 2015, 2017) भारत आए हैं| कोई दूसरा जापानी प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में इतनी बार भारत यात्रा पर नहीं आया|
भारत ने 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन परीक्षण किए, दो दिन बाद 13 मई को दो और परीक्षण किए गए| इसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों ने भारत पर प्रतिबंध लगाए, उन देशों में जापान भी एक था| ये प्रतिबंध दो साल तक रहे, फिर साल 2000 में दोनों देशों के रिश्तों में एक बार गर्मजोशी दोबारा लौटी| और रक्षा, सुरक्षा, मेरीटाइम सिक्योरिटी से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तक हर जगह जापान की मौजूदगी का बहुत हद तक श्रेय जापान की तरफ से शिंज़ो आबे को जाता है|
भारत में दिल्ली मेट्रो जापान की मदद से ही बनी है, मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना की नींव भी शिंज़ो आबे के सामने रखी गई और तकनीक भी भारत ने जापान से ही ली है| शिंज़ो आबे, भारत के ‘एक्ट ईस्ट’ Act East नीति का एक अहम हिस्सा थे| एक्ट ईस्ट भारत सरकार की विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की तरफ़ भारत अहम सहयोग और साझीदारी की पहल कर रहा है, जापान और भारत मिल कर पूर्वोत्तर की परियोजनाओं में भी साथ हैं|
शिंज़ो आबे 2007 में भारत की संसद में बोल रहे थे, उन्होंने “दो समुद्रों के संगम” का नारा दिया, यहीं से हिंद-प्रशांत कॉन्सेप्ट के महत्त्व को असल में विस्तार मिला| वर्ष 2014 में भारत के गणतंत्र दिवस पर वो मुख्य अतिथि के तौर पर आए और उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को इस सदी का अहम रिश्ता कहा था| आज जापान के साथ भारत की कई अहम क्षेत्रों में भागीदारी है, जिसमें सबसे अहम क्वॉड Quadrilateral Security Dialogue (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) समूह को माना जाता है| क्वॉड समूह में अमेरिकी, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत एक साथ आए. साल 2017 में जब दोबारा से इसे रिवावई किया गया उसमें शिंज़ो आबे की भूमिका मुख्य थी| भारत और जापान के बीच सामरिक सहयोग सबसे ज़्यादा है, लेकिन क्वॉड समूह के ज़रिए जब ये चार देश एक साथ आए, उस वजह से वैक्सीन से लेकर सिक्योरिटी तक हर स्तर पर आपस में सहयोग बढ़ा| (साभार गूगल)