प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में अटकले लगाई जा रहीं हैं कि जल्द ही शायद बीजेपी गुजरात में फैसल पटेल से सम्पर्क कर सकती है या किसी के माध्यम से ऐसी कोशिश कर भी चुकी हो। लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि अगर गुजरात के 2027 के आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी फिर से सत्ता में आना चाहती है तब वह अन्य राजनीतिक दलों से टूट कर आने वाले परिवारवाद को ही आगे क्यों बढ़ाना चाहती है! हालांकि अभी कुछ समय पहले ही हुए बीजेपी राज्य सरकार के सभी मंत्रियों के फ़ेरबदल पर पहले ही सवाल खड़े हो रहें हैं वहीं दूसरी तरफ अब ये नई रणनीतिक चर्चा।
मेरा तो यहाँ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से सवाल है कि क्या बीजेपी गुजरात को कोई अन्य चेहरा वहां दिखाई नहीं देता। मैं यहाँ बीजेपी और गुजरात की जनता का ध्यान आचार्य सूर्यसागर की तरफ करवाना चाहती हूँ जोकि न केवल गुजरात में बल्कि पुरे भारत वर्ष में बीजेपी का वोटबैंक भी बढाएंगे और सत्ता में भागीदार बन कर पुरे देश में उनके मार्गदर्शन में देश के विकास के लिए हर वर्ग तत्पर और तैयार होता रहेगा। लेकिन समझ ही नहीं आता कि हमारे आचार्य देशभक्तों की तरफ बीजेपी देख ही नहीं पा रही है।
हालांकि हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी तो स्वंय हमारे आचार्य, गुरुओं के आश्रमों में देश और धर्म की सुरक्षा के लिए नतमस्तक होते ही रहें हैं लेकिन अपने ही गृह राज्य गुजरात में मोदी जी आचार्य सूर्यसागर से दूर क्यों हैं। 2024 में भी बीजेपी आचार्य सूर्यसागर को सांसद का चुनाव लड़वाने के लिए सम्पर्क कर चुकी थी फिर सत्ता के गलियारों में ऐसा क्या हुआ कि जो टिकट उनका फाइनल हुआ था वो किसी और को दे दिया गया। क्या इसके पीछे कोई राजनीति है या फिर कोई षड्यंत्र। गुजरात की जनता का बीजेपी से इस पर सवाल तो पूछना बनता है।
गौरतलब है कि अभी हाल ही में दिवंगत कांग्रेस नेता अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल ने फेसबुक पर लोगों से पूछा है कि क्या वह कांग्रेस से अलग होकर कांग्रेस (AP) नाम से नया संगठन शुरू करें? फैजल पटेल ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि मेरी बहन मुमताज पटेल भी मेरे साथ जुड़ सकती है। मैं कांग्रेस पार्टी को तोड़ने का सोच रहा हूं। इसका नाम कांग्रेस (AP) रखूंगा। क्या राय है सबकी?
अब बीजेपी को खुद ही सोचना चाहिए कि एक तरफ वो बरसों से जिस कांग्रेस ने उनके परिवार को पाला वो अब उसके ही टुकड़े करने को तैयार है वहीं दूसरी तरफ उन्होंने गुजरात बीजेपी के तत्कलीन प्रदेश प्रमुख सी आर पाटिल से मुलाकात करके कांग्रेस पार्टी नेतृत्व को भी हैरानी में डाल दिया था।
यहाँ यह तो साफ हो गया है कि कांग्रेस के नेता ही राजनीति पर पकड़ बनाये हुए हैं और बीजेपी उनके ही छोड़े हुए परिवारवादी नेताओं पर अपनी राजनीतिक चौसर खेलने में लगी हुई है वर्ना क्या जरुरत थी गुजरात बीजेपी के तत्कलीन प्रदेश प्रमुख सी आर पाटिल को उनसे मुलाकात करने की। अगर कोई कहे ये मुलाकात केवल एक आम मुलाकात थी तब मेरा सोचना है कि ये कहना गलत होगा क्योंकि सत्ता के गलियारों में कोई भी मुलाकात आम नहीं होती। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व या तो कुछ छुपा रहा है या फिर कहीं न कहीं कुछ पक जरूर रहा होता है।
बीजेपी को सोचना चाहिये कि जब कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी के सालों तक राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल के बेटे फैसल पटेल ने नई कांग्रेस एपी (अहमद पटेल) बनाने का ऐलान किया है। जब वो उनका न हुआ तब सत्ता में आ कर वो तुम्हारा कैसे हो जायेगा। फैसल पटेल के फैसले पर उनकी बहन मुमताज पटेल ने खुद को कांग्रेस के साथ रहने का ही ऐलान किया है। वहीं दूसरी तरफ असुदद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने लिखा है कि फैसल पटेल को अलग ग्रुप बनाने की जरूरत नहीं बल्कि वह AIMIM में शामिल हो जाएं। खूब इज्जत सम्मान उनको हमारे यहाँ मिलेगा जैसे उनके वालिद को मिलता था।
कांग्रेस पार्टी का तो पता नहीं लेकिन फैसल पटेल ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं जिससे गुजरात में राजनीति गरमा गई है और बीजेपी पर भी सवाल उठ खड़े हुए हैं। क्या आने वाले चुनाव में बीजेपी देशभगत आचार्य सूर्यसागर की जगह फैसल पटेल को गुजरात राज्य की राजनीति में तर्जहीं देगी या फिर आरएसएस या बीजेपी शीर्ष नेतृत्व जल्द ही आचार्य सूर्यसागर से संपर्क साधकर गुजरात की जनता को स्पष्ट संकेत देगी कि जब-जब भगवा कि बात आएगी तब-तब बीजेपी द्वारा देश के स्वाभिमान से कोई समझौता नहीं किया जायेगा। ©️डॉ. मनु चौधरी
