
आम-आदमी-पार्टी-Bhagwant-Maan
चंडीगढ़,13 अगस्त 2022: आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट कर जानकारी दी कि राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित द्वारा ‘एक विधायक एक पेंशन‘ वाले गजट नोटिफिकेशन को मंजूरी दे दी गई है। इससे मुझे पंजाब की जनता को यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि इससे लोगों के टैक्स का बहुत पैसा बचेगा।
आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले जनता को गारंटी दी थी कि पूर्व विधायकों को उनके प्रत्येक कार्यकाल की बजाए केवल एक कार्यकाल की पेंशन दी जाएगी। इस तरह सरकारी खजाने में लाखों रुपये बचाए जा सकेंगे।
भगवंत मान सरकार ने बीते 30 जून को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान, पंजाब के पूर्व विधायकों को दी जाने वाली पेंशन से संबंधित, पंजाब राज्य विधानमंडल सदस्य (पेंशन और चिकित्सा सुविधाएं विनियमन) संशोधन विधेयक 2022 पारित किया था। इसके बाद यह संशोधन विधेयक राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित की सहमति के लिए भेज दिया गया, जिसे राज्यपाल ने अब मंजूरी दी है। इसे पहले मई के अंतिम सप्ताह में राज्यपाल ने लौटा दिया था कि इसे अगले आनेवाले सुनिश्चित सत्र में विधेयक के रूप में लायें।
पंजाब सरकार ने 11 अगस्त को एक विधायक, चाहे वह कितनी ही बार विधायक रहा हो, को एक पेंशन देने संबंधी प्रस्ताब कैबिनेट में प्रस्तुत किया था। पंजाब के राज्यपाल द्वारा इस अधिनियम को मंजूरी मिलने के बाद, पंजाब सरकार ने अब एक अधिसूचना जारी की है। यह अब एक कानून के रूप में लागु हो गया है। और, इसके अनुसार, दी पंजाब स्टेट लेजिसलेचर मैंबर्स (पेंशन व मेडिकल फैसिलीटीज रेगुलेशन) एक्ट 1977 के सेक्शन 3 की उपधारा (1) के लिए बदली गई उपधारा अब इस प्रकार होगी :
1. सदस्य के तौर पर रहे प्रत्येक व्यक्ति को 60,000 रुपये प्रति माह पेंशन और उस पर मंहगाई भत्ता (जो पंजाब सरकार के पेंशनरों पर लागू होता है) का भुगतान किया जाएगा। भले ही उस व्यक्ति ने सदस्य के तौर पर कितनी ही बार विधायक रहे हों और भले ही पंजाब विधानसभा के कितने ही कार्यकाल हो, जिसमें उस व्यक्ति ने एक सदस्य के रूप में सेवा निभाई हो।
2. अगर कोई व्यक्ति, जोकि सदस्य के तौर पर सेवा निभाते हुए 65 साल, 75 साल और 80 साल का हो जाता है, तो ऐसी उम्र का होने पर वह आरंभिक पेंशन में क्रमश: 5 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का हकदार होगा।
पंजाब सरकार ने गत 2 मई कैबिनेट की बैठक में, पूर्व विधायकों की पेंशन बारे बदलाव को लागू करने के उद्देश्य से पंजाब राज्य विधानमंडल सदस्य (पेंशन और चिकित्सा सुविधाएं विनियमन) अधिनियम, 1977 में उपयुक्त संशोधन को मंजूरी दी थी। हालांकि नियमानुसार एक अध्यादेश के रूप में इसे लागू करने के लिए राज्यपाल की मंजूरी आवश्यक थी।
पंजाब सरकार ने राज्य के पूर्व विधायकों को उनके प्रत्येक कार्यकाल के लिए दी जा रही पेंशन की जगह केवल एक पेंशन देने संबंधी जो प्रस्ताव हाल ही में विधानसभा में पारित किया था, उसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजने के साथ ही गत मार्च माह से सूबे के पूर्व विधायकों को मिल रही पेंशन की अदायगी भी रोक दी थी। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ यह अधिनियम अगस्त माह में कानून बन गया है, जिसके चलते पूर्व विधायकों को मार्च से जुलाई तक की पेंशन पिछले नियम के अनुसार ही अदा की जाएगी। (चित्र साभार गूगल)