MS-Dhoni.

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नई दिल्ली, 27 जुलाई 2022: महेंद्र सिंह धोनी का क्रिकेट Cricket की दुनिया में उनके शानदार प्रदर्शन से करोड़ो लोग उनके दीवाने हैं। किन्तु धोनी आजकल मीडिया में धोखाधड़ी के केस के कारण सुर्ख़ियों में बने हुए हैं। MS Dhoni वर्तमान में बंद हो चुकी रीयल एस्टेट का बिजनेस करने वाली आम्रपाली समूह के ब्रांड एंबेसडर थे। इस रीयल एस्टेट कंपनी के ब्रांड एंबेसडर की पोस्ट पर रहना महेंद्र सिंह धोनी के लिए अब मुसीबत बन कर आया है। आम्रपाली के खरीदारों ने इस धोखा से पीड़ित होकर कोर्ट में शिकायत किये थे।

मामला आम्रपाली रियल स्टेट Amrapali Real Estate और महेंद्र सिंह धोनी के ब्रांड का प्रचार करने वाली कंपनी रिथी स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड RSMPL के बीच एक फर्जी समझौता का है। जिससे की इस आवास के खरीददारों की रकम के साथ अवैध रूप से हेराफेरी की जा सके। इसके रिकॉर्ड की जाँच से समाने आया कि 2009 से 2015 के बीच में 42.22 करोड़ रुपये RSMPL को दिए गए थे। यह मामला 150 करोड़ के लेन–देन का है। इसकी जानकारी शीर्ष न्यायालय के द्वारा नियुक्त फॉरेंसिक ऑडिटर ने अदालत को दी थी।

इस विवाद को लेकर वर्ष 2019 में अप्रैल में महेंद्र सिंह धोनी उच्च न्यायालय गए। 10 वर्ष पहले आम्रपाली समूह की एक परियोजना में उनके द्वारा बुक किये गये 5,500 वर्ग फुट से अधिक बड़े एक पेंटहाउस पर अपने स्वामित्व के संरक्षण का अनुरोध किया था। जिस पर केस के अधिवक्ता ने कहा कि कम्पनी का ब्रांड एंबेसडर होने को लेकर रियल एस्टेट कंपनी ने महेंद्र सिंह धोनी को मोटी रकम दी थी। हमने पूर्व में दलील दी थी कि यह रकम वापस ली जाए और ‘धन वापस पाने का मामला शीर्ष न्यायालय में जारी है।”

इस मामले को लेकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी दिल्ली उच्च न्यायालय गए थे। उच्च अदालत ने 16 अक्टूबर 2019 को पूर्व न्यायाधीश वीणा बीरबल को महेंद्र सिंह धोनी और रियल एस्टेट कंपनी के बीच मध्यस्थता के लिए एकमात्र मध्यस्थ नियुक्त किया था। उस बेंच के न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी को अदालत द्वारा नियुक्त रिसीवर ने सोमवार को धोनी और रियल एस्टेट कंपनी के बीच लंबित मध्यस्थता कार्यवाही तथा इसे आगे बढ़ाने में उनके समक्ष आ रही समस्याओं के बारे में बताया था।

महेंद्र सिंह धोनी की मध्यस्थता कार्यवाही पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाया और धोनी को नोटिस भेजा। इस आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा कि आवास खरीददारों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए विषयों का संज्ञान लिया गया है। साथ ही एक अदालती रिसीवर नियुक्त किया ताकि आवास परियोजनाएं समय के अंदर पूरी हो जाएं और अपार्टमेंट खरीदारों को फ्लैट्स आवंटित हो सके।

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